लखनऊ शहर का अलीगंज जो बेगम आलिया के नाम से बसाया गया।

आस्था और विश्वास के केंद्र के रूप में प्रसिद्ध अलीगंज का पुराना हनुमान मंदिर नवाबी कला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। नवाब सहादत अली के कार्यकाल (1798-1814) के दौरान मंदिर का निर्माण हुआ था। नवाब ने अपनी माँ आलिया बेगम के आग्रह पर मंदिर का निर्माण कराया था । आलिया बेगम ने निवासियों से संतान सुख की प्राप्ति होने पर मंदिर निर्माण का वादा किया । मंदिर के गुम्बद पर चाँद की आकृति हिन्दू-मुस्लिम एकता की कहानी बयां कार्य है। यह भी कहा जाता है कि राजधानी में परिक्रमा करके मंदिर पहुचाने की शुरूआत भी इसी मंदिर से की गयी थी। राजधानी में ज्येष्ठ के पहले बड़े मंगल की शुरुआत का गवाह भी यही मंदिर है । मेले को लेकर यह भी कहा जाता है कि कैसर का व्यापार कण्व वव्यापारी यहाँ आये थे । उनका केसर बिक नहीं रहा था। नवाब वाजिद अली शाह को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने व्यापारी से पूरा केसर खरीद लिया था।                                                                                                   कुछ बाते लखनऊ के लिए भी-                                                                                                                     नज़ाकत, नाफ़ाक़त और तहज़ीब की बात जब आती है, उसमे लखनऊ का सबसे पहले आता है। पूरी दुनिया में ऐसा कोई शहर नहीं है जो इसके पास खड़ा होता हो। सामाजिक सरोकर को लेकर यहाँ के लोगो की संजीदगी बरबस लोगो को यहाँ की शैली से जोड़ती है। गोमती नदी दोनी किनारे पर  ऐसे या शहर की मिटटी में जो अपनापन है वह है नहीं है।   लखनऊ की मेहमान नवाजी और संस्कृति कितनी अलग। ािाितहासिक इमारते हमारी पुराणी सशक्त कला को दिखाती है।                                                                                                                                                          बड़ा इमामबाड़ा गर्व है तो रूमी गेट कला शैली का सशक्त उदहारण है। रेजीडेंसी क्रांतिकारियों क़ी याद दिलाती है तो आलमबाग गेट शहीदों की जाबांजी की याद ताजा करती है।






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