RBI क्यों नहीं छापता अधिक नोट ?
नोट limeted अमाउंट में क्यों छापते है-
कभी आप सोचते होंगे की RBI बहुत सारे नोट क्यों नहीं छाप देता, नोट छापने के लिए चाहिए क्या होता है बस बस मशीन, कुछ लोग, और कागज़ ।
लेकिन RBI कभी भी मार्किट वैल्यू से ज़्यादा नोट नहीं छापता है, समझते है क्यूँ नहीं छापता?
सबसे पहले बात करते है नोट के छपाई की-
RBI का गठन 1934 act के अनुसार किया गया था और RBI को नोट issue करने की पावर दी गयी थी।
RBI की 4 branch पुरे इंडिया में note छापने (प्रिंटिंग प्रेस)काम कर रही है इस वक़्त-
इनका नाम इस तरह है-
1-महाराष्ट्र( नासिक)।
2-मध्य प्रदेश (देवास)।
3-कर्नाटक (मैसूर)।
4-पश्चिम बंगाल (सल्बोनी)
RBI की जो ये काम करती है, उसका नाम है-
(भारतीय रिज़र्व बैंक नोट मुद्रा)
RBI ज़्यादा से ज़्यादा 10 हज़ार तक के नोट छाप सकता है और अगर RBI को इससे ज़्यादा के नोट छापने पड़े तो इसके लिए सरकार को 1934 act में बदलाव करना पड़ेगा।
इनमे से नासिक और देवास की प्रिंटिंग press को भारतीय सरकार control करती है और बाकि को RBI कण्ट्रोल करती है।
रही बात नोट के छपाई की तो RBI साल की शुरूआत में ही प्रिंटिंग प्रेस को निर्देश दे देता है साल में कितने नोट छापने है। इसके लिए RBI पहले से ही डाटा तैयार कर लेता है। RBI पहले से गढ़ना कर लेता है कि इंडिया में कितने नोट circulate हो रहे और कितना पिछले साल ख़राब हो चुके है और कितने छपे जाने है। इन सब गढ़ना के बाद रबी finanace minister की coincent डिवीज़न में disccus करता है और उनसे डिसकस करने के बाद तेय किया जाता है कि कितने नोट वर्तमान साल में छापे जाने है।
RBI की पास ऐसा क्या है ?
जवाब कीमती धातु सोना (गोल्ड) और भारतीय रिज़र्व बैंक का forien reserve।
RBI के पास जितना सोना और forien reserve है उतने ही RBI नोट की छपाई करता है, अगर RBI ने इस वैल्यू से ज़्यादा छपाई की तो रुपए की वैल्यू गिर जायेगी, यानी RBI की currecy को ascet और vat नहीं किया गया तो RBI की currency का हाल भी वानुज़ोइला कि तरह होगा। वानुज़ोइला में एक लाख तक नोट छापे गए है और इन नोट की वैल्यू कोडोये के बराबर भी नहीं है।
यही कारण है currenccy की इंटरनल value को मेन्टेन करने के लिए RBI और gov संतुलन बनाकर चलती है !


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